तुलसीदास के दोहे | Tulsidas ke Dohe(कलियुग /Kaliyuga ) सो कलिकाल कठिन उरगारी।पाप परायन सब नरनारी। कलियुग का समय बहुतकठिन है।इसमें सब स्त्री पुरूस पाप में लिप्त रहते हैं। कलिमल ग्रसे धर्म सब लुप्त भये सदग्रंथ दंभिन्ह निज मति कल्पि करि प्रगट किए बहु पंथ। कलियुग के पापों ने सभी धर्मों को ग्रस लिया है। […]